Photo: Pexels कौसानी को अपनी अनुपम प्राकृतिक सुंदरता के कारण भारत का स्विट्जरलैंड भी कहा जाता है। समुद्र तल से 1,890 मीटर की ऊँचाई पर बसा यह रमणीय स्थल अल्मोड़ा के उत्तर में लगभग 53 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में यह स्थान वलना नाम से जाना जाता था। महर्षि कौशिक के कठोर तप के कारण इसका नाम कौसानी पड़ा। प्रसिद्ध हिंदी कवि सुमित्रानंदन पंत की जन्मस्थली कौसानी ने अपने नैसर्गिक सौंदर्य से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को भी अभिभूत किया था। यहाँ की प्राकृतिक छटा देखते ही बनती है। हिमाच्छादित त्रिशूल, नंदा देवी और नंदाकोट जैसी पर्वत चोटियाँ, हरी-भरी घाटियाँ और उनमें बिखरे रंग-बिरंगे फूल कौसानी को अद्भुत रूप प्रदान करते हैं। इसकी मनोहारी सुंदरता ऐसी है कि यहाँ आने वाला प्रत्येक पर्यटक सहज ही प्रकृति के आकर्षण में बंध जाता है। कौसानी के आकर्षण अनासक्ति आश्रम यह वही पावन स्थल है, जहाँ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने वर्ष 1929 में अपने प्रवास के कुछ दिन बिताए थे। कौसानी की अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण से गांधीजी अत्यंत प्रभावित हुए। उन्होंने अपने लेखों में कौसानी...
कश्मीर की लिद्दर घाटी में स्थित श्री अमरनाथ की गुफा प्रकृति और आस्था के अद्भुत संगम का प्रतीक है। समुद्र तल से लगभग 3,680 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह पवित्र गुफा बर्फ से ढकी ऊँची पर्वत चोटियों और मनोहारी प्राकृतिक दृश्यों से घिरी हुई है। यहां पहुंचकर श्रद्धालु हिमालय की आध्यात्मिक ऊर्जा और अलौकिक शांति का अनुभव करते हैं। हर वर्ष श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) में देश-विदेश से श्रद्धालु प्राकृतिक रूप से निर्मित बर्फ के शिवलिंग के दर्शन के लिए अमरनाथ पहुंचते हैं। इस हिम शिवलिंग को भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि चंद्रमा की कलाओं के साथ शिवलिंग के आकार में भी परिवर्तन होता है और श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर यह अपने पूर्ण आकार में दिखाई देता है। इसी कारण इस दिन अमरनाथ यात्रा में विशेष धार्मिक महत्व रखता है। श्रद्धालु पवित्र अमरावती नदी में स्नान करने के बाद अमरनाथ गुफा में पहुंचकर हिम से निर्मित शिवलिंग के दर्शन करते हैं। कठिन पर्वतीय यात्रा के बावजूद लाखों श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, आध्यात्मिकता और हिमालय की विराट प्राकृतिक...